क्या सच में चाँद पर एलियंस का घर है?

इस बारे में लोगों के अलग-अलग तर्क है उनमें से कुछ तर्क इस प्रकार हैं
1- 1969 में मानव चांद की सतह पर दो बार पहुंचता है। एक बार जुलाई में और दूसरी बार नवंबर में। इसके बाद लगातार 1972 तक अमेरिका चांद पर मानव मिशन भेज रहा था फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि चांद पर जाने से विश्व के देश बचने लगे ?
कारण- एलियंस थ्योरी मानने वालों का कहना है कि चांद पर रहने वाले परग्रहियों ने अमेरिका को यहां ना आने की चेतावनी दी है। नील आर्म स्ट्रांग ने भी कहा था कि अंतरिक्ष में उनके यान का पीछा कोई बहुत एडवांस टेक्नोलॉजी वाला यूएफओ कर रहा था।
2- नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन जब चंद्रमा की सतह पर घूम रहे थे तब कुछ समय के लिए उनका प्रसारण रोक दिया गया था। वह कुछ कहना चाहते थे लेकिन उनकी आवाज काट दी गई थी
कारण- लोगों का कहना है कि दोनों चंद्र यात्रियों ने वहां एलियन के यान का मलबा देखा था उसी के बारे में भी कुछ बोलना चाहते थे लेकिन नासा ने प्रसारण में रुकावट पैदा कर दी।
3- एलियन टावर जी हां चीन के अंतरिक्ष यान ने चांद के अंधेरे भाग पर विशाल एलियन संरचनाओं की बात कही है। यान से मिले डाटा के मुताबिक चांद की सतह पर खड़े टावर लगभग 2 से ढाई किलो मीटर ऊंचे हैं। इनका निर्माण प्राकृतिक तो बिल्कुल नहीं है।
कारण- एक वेबसाइट के मुताबिक यह एलियन टावर कई हजार साल पहले परग्रहीयों ने पृथ्वी पर नजर रखने के लिए बनाए थे। फिलहाल यह टावर वीरान पड़े हैं।
4- चांद पर संगीत बजने की आवाज कई चंद्र यात्रियों ने सुना है। हालांकि नासा ने कभी भी इस बारे में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। लेकिन यात्रियों ने तमाम इंटरव्यू मैं इस बात को स्वीकार किया है कि चांद पर एलियंस आते रहते हैं और उन्होंने अपना बेस चांद पर बनाया है।
कारण- एलियंस थ्योरी पर काम करने वालों का कहना है कि चांद की सतह के नीचे एलियन से अपना अड्डा बनाया है। इनक कहना है कि चांद अंदर से खोखला है।
अब जो भी हो सच्चाई आम लोगों के लिए जान पाना संभव नहीं है। एलियन होते हैं इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता। वरना अब तक चांद पर मनुष्य अपनी कालोनी बनाकर खनन काम करना शुरू कर चुका होता। जब कि टेक्नालॉजी बहुत एडवांस हो गई है। नासा के पास से चांद पर लैंडिंग के ओरिजनल प्रिंट गायब हो जाना भी बहुत से सवाल खड़ा करता है।



